आज वक़्त के बारे में कुछ बताना चाहता हु तो आखिर कहा से हुए थी वक़्त कि शुरवात जब दुनिया बनी तबी ही वक़्त कि शुरवात हुए होगी। … हमे अल्बर्ट आइंस्टीन के e=mc2 इस सिद्धांत से हमे ब्रम्हांड का रहस्य पता चला तो ये ब्रम्हांड कैसे बना होगा ब्रम्हांड एक महाविस्पोट से बना जिसका समीकरण e=mc2 है E का मतलब
Energy मतलब ऊर्जा और M का मतलब MASS यानि द्रव्यमान और C2 मतलब SPEED OF LIGHT प्रकाश कि गति..... जब ये महाविस्पोट हुआ तो बहुत सारी ऊर्जा बाहर निकली और रूपांतर एक वस्तु में हुआ तो वो वस्तु ब्रम्हांड थी लेकिन ब्रम्हांड क साथ और चीज का जन्म हुआ और वो था समय। … समय उतना ही बड़ा हे जितना कि ब्रम्हांड। .... तो आइंस्टीन ने कहा हे समय एक आयाम हे जो कि उन्होंने सही कहा और साथ ही ये कहा कि स्थानानुसार समय कि गति परावर्तित होती हे और न्यूटन का कहना था कि ब्रम्हांड के किसे भी स्थान समय कि गति सामान होती है जो कि आइंस्टीन के अनुसार सही नही हे.…। तो सही क्यों नही है जैसे कि आइंस्टीन ने कहा है कि।
जब आप एक अच्छी लड़की के साथ बैठे हों तो एक घंटा एक सेकंड के सामान लगता है.जब आप धधकते अंगारे पर बैठे हों तो एक सेकंड एक घंटे के सामान लगता है. यही सापेक्षता है.
तो आपने कभी ये सोचा कि जब एक अच्छी लड़की साथ होती तो एक घंटा एक से सेकण्ड क बराबर क्यों लगता क्यों कि उस वक़्त हमारा दिमाग साधारण परिस्थिति से थोडा तेज काम करना शुरू कर देता है.. इसका मतलब समय कि हमारे अनुसार बढ़ता और कम होता जैसे मन लो कि वक़्त एक साया और साया उतना ही बड़ा होता जितना कि वो जिस वस्तु या इंसान य़ा ब्रम्हांड के किसे भी ऑब्जेक्ट का जैसे मान लो कि हम धुप में कही जा रहे तो हमारा साया भी उतना ही हमारे साथ चलता और हम रुक जाये तो साया भी रुक जाता है हम जितना तेज चले साया भी हमारे अनुसार ही तेज चलता हे हम अगर दौड़ लगाये तो साया भी उतना ही तेज दौड़ लगा हे। … और हम रुक जाये तो साया भी रुक जाता हे वैसे ही समय का है हम अगर
किसी एक जगह से दूसरी जगह जा रहे तो हमे कुछ समय लगता हे जैसे मान लो मुम्बई से दिल्ली जा रहे तो हमे ट्रेन से जाने लगभग एक दिन लग जाये। … पर अगर हम हवाई जहाज से जाये तो एक या दो घंटे काफी होते है इसका मतलब साफ है कि समय हमारे अनुसार कम या जड़ा हो रहा है और दोनों शहर यानि मुम्बई और दिल्ली अपनी अपनी जगह वही है सिर्फ बात समय कि। …। तो हमें य़े कहना गलत होगा कि समय कि कोई गति होती समय कि गति ब्रम्हांड कि कोई भी वस्तु अपने अनुसार निर्धारित करती है जैसे आइंस्टीन के अनुसार मंगल ग्रह का एक सेकण्ड पृथ्वी के एक सेकण्ड बराबर नही होता पर हक़ीक़त में बात ये है कि दोनों ग्रहो का एक सेकण्ड अलग तो है पर मंगल ग्रह का जो एक सेकण्ड है वो मंगल ने अपने गुरुत्व बल के अनुसार खुद निर्धारित किया है और पृथ्वी का एक सेकण्ड पृथ्वी ने अपने गुरुत्व बल के अनुसार खुद निर्धारित किया है इसमें गति मंगल ग्रह कि और पृथ्वी कि दिखाई देती है ना कि समय कि अगर मंगल का एक सेकण्ड पृथ्वी के एक सेकण्ड से जादा तेज है तो साफ जाहिर है कि मंगल कि गति पृथ्वी के गति से जादा है पर दोनों कि गति कि गति अगर बराबर होती दोनों ग्रहो का एक सेकण्ड भी बराबर होता पर दोनों कि गति भिन्न होने के कारन दोनों कि गति अलग हे इससे ये पता चलता कि ब्रम्हांड कि कोई भी वस्तु कि गति जैसी होगी उस वस्तु के गति अनुसार समय भी वैसा ही होगा… जैसे जब हम कोई सामान्य गति से हमारे मस्तिष्क अनुसार हम जैसा काम करते है तो समय भी सामान्य चलता है पर जैसे हम किसे सिनेमा घर में ३ घंटे सिनेमा देखते है तो हमारे सामान्य ३ घंटे के मुकाबले वो सिनेमा घर के ३ घंटे बहुत तेज चले गए पर जैसे हम सिनेमा घर के बाहर आते है हम देखते कि समय सामान्य हे …। तो बात ये है अब तक हमें समय तेज लग रहा था पर सिनेमा घर के बाहर आते ही समय जो का तो ही… क्यों कि हमारे अनुसार समय अब तक तेज चल रहा था पर अब वो सामान्य ही लग रहा है क्य़ो कि हमारी गति कम जादा हो रहे है पर पृथ्वी तो अपने सामान्य गति अनुसार ही चल रही है और हम पृथ्वी पर रहते है। .... इसलिए हम भी हमारा समय
पृथ्वी के गति अनुसार निर्धारित करते है. पर अगर पृथ्वी अपनी सामान्य गति के मुकाबले जादा तेज घूमना शुरू कर दे तो हम पाएंगे कि दिन और रात भी उतने ही तेज हो रहे और समय कि गति भी बड़ गयी है पर अगर पृथ्वी सामान्य गति के मुकाबले कम तेजी से घूम रही तो समय कि गति भी कम हो जायंगी पर
मान लो अगर पृथ्वी घूमना बंद कर दे तो समय भी रुक जायेगा पर समय कभी रुक नही सकता क्यों कि धरती भी कभी रुक नही सकती और ना ही ब्रम्हांड कि कोई वस्तु क्यों कि कोई वस्तु अगर रुक जाये तो समय का अस्तित्व ही नही रहता और जहा या फिर जिस वस्तु के लिए समय रुक गया हे. तो उस वस्तु का अस्तित्व ही मिट जायेगा जैसे इंसान जब मर जाता है उसके लिए समय का अस्तित्व ही है इसका मतलब वो खुद इंसान ही अस्तित्व में नही है.... पर जब तक वो इंसान अस्तित्व में था तब तक उसके लिए समय भी अस्तित्व में था.…और जब उस इंसान का अस्तित्व ख़तम हो गया गया तो समय का अस्तित्व भी ख़तम हो गया.। अल्बर्ट आइंस्टीन क अनुसार समय लम्बाई चौड़ाई और उचाई कि तरह एक आयाम है जो कि उन्होंने सही कहा लेकिन समय का अस्तित्व तो है पर उसके कोई वास्तविक स्वतंत्र गति नही है .... समय कि सापेक्षता ब्रम्हांड के कण कण में पर उसे गति देणे का काम ब्रम्हांड का हर कण अपने गति अनुसार समय को गति देता है जैसे उस कण गति होगी वैसे ही उस कण लिए समय गति होगी .... अल्बर्ट आइंस्टीन और न्यूटन दोनों ने ही समय कि गति को स्वीकारा है समय कि कोए गति ही नही है और समय के बारे में दोनों कि राय अलग थी न्यूटन का कहना था कि मंगल और धरती का एक सेकंड एक जैसा ही है पर आइंस्टीन के अनुसार समय स्थानानुसार अपनी गति परावर्तित कर लेता हे पर स्थानानुसार समय कि गति परिवर्तित तो होती पर समय खुद अपने गति परावर्तित नही करता वो स्थान ही अपने अनुसार समय को गति प्रधान करता है क्यों कि ब्रम्हांड का कोई भी स्थान हो या कण हर स्थान और कण की अपनी स्वतंत्र गति होती है और वो स्थान ही समय को गति देता है. और समय बस आयाम है और समय गतिशून्य है और उसका अस्तित्व एक साया है समय उतना ही अनंत है जितना कि ब्रम्हांड और तब तक ही समय का अस्तित्व है जब तक ब्रम्हांड का अस्तित्व है और बिगबैंग के अनुसार अगर ब्रम्हांड फ़ैल रहा है तो समय भी उतना ही फ़ैल रहा है और जहा तक ये ब्रम्हांड का अस्तित्व रहेगा वहा तक समय भी रहेगा लेकिन समय उसी गति से कम कम करेगा जिस गति से ब्रम्हांड और ब्रम्हांड का कोई स्थान करता है उसके अनुसार करता है जैसे अगर मंगल ग्रह का एक सेकंड धरती के एक सेकंड से जादा तेज है तो इसका मतलब ये है मंगल ग्रह गति धरती के गति से जादा तेज है इस लिए मंगल का समय भी धरती से जड़ा तेज है पर इसमें समय का कोई गुणधर्म या हस्तक्षेप नही है इसमें मंगल के गति का गुणधर्म मालूम होता जैसे मंगल कि गति अगर तेज होगी तो समय भी वैसा ही तेज होगा और मंगल कि गति धीमी होगी तो समय भी वहा उतना ही धीमा होगा इससे साफ जाहिर होता है कि समय का अस्तित्व तो है पर समय कि कोई स्वतंत्र गति नही है समय गतिशुन्य है.